कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में लगातार गिरावट के बीच स्थानीय बाजार में पेट्रोल का भाव सोमवार को आठ महीने में पहली बार 71 रुपये प्रति लीटर से नीचे आ गया। सऊदी अरब और रूस के बीच तेल बाजार में कीमत युद्ध (मूल्य घटाने की होड़) छिड़ने से सोमवार को कच्चा तेल अंतराष्ट्रीय वायदा बाजार में 31 प्रतिशत तक टूट गया था। मालूम हो कि वर्ष 1991 के खाड़ी युद्ध के कच्चे तेल की कीमतों में यह सबसे बड़ी गिरावट है, जिससे भारत को वित्तीय लाभ हो सकता है क्योंकि देश पेट्रोलियम ईंधन के लिए बड़ी सीमा तक आयात पर निर्भर करता है। तेल उत्पादक और उसके सहयोगी देशों के संगठन ओपेक प्लस की शुक्रवार को हुई बैठक में उत्पादन घटाने पर सहमति नहीं बनने से निर्यातक देशों के बीच कीमत युद्ध छिड़ गया है। सोमवार को ब्रेंट कच्चा तेल भाव 31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गोल्डमैन सैश ने चेतावनी दी है कि भाव 20 डॉलर तक जा सकता है।
भारत 84 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है
भारत अपनी जरूरत का 84 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी से देश के आयात बिल में कमी आएगी और इससे खुदरा कीमतें भी कम होंगी। हालांकि, इससे पहले से दबाव में चल रही ओएनजीसी जैसी कंपनी की हालत और खराब होगी। यद्यपि विभिन्न क्षेत्रों के लिए लागत कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को थोड़ा संबल मिलेगा। इससे कई क्षेत्रों के लिए कच्चे माल की लागत कम होगी।
जुलाई 2019 के बाद यह पेट्रोल की सबसे कम कीमत है
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा जारी कीमत अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत सोमवार को 70.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। जुलाई 2019 के बाद यह पेट्रोल की सबसे कम कीमत है। वहीं डीजल का दाम 63.26 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। हालांकि, ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 27 फरवरी के बाद से नीचे आने का रूझान बना हुआ है। तब से अब तक पेट्रोल की कीमत में 1.42 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 1.44 रुपये प्रति लीटर कमी आ चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम में केवल एक ही बात हतोत्साहित करने वाली है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 23 पैसे गिरकर 74.10 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ है। रुपये के कमजोर होने से भारत को विदेशों से समान मात्रा में सामान खरीदने के लिए अब अधिक भुगतान करना होगा।
22.5 करोड़ टन कच्चे तेल के लिए भारत देगा 105.58 अरब डॉलर
कीमत घटने से भारत का आयात बिल 2,936 करोड़ रुपये कम
कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर की कमी से भारत का आयात बिल 2,936 करोड़ रुपये कम होता है। इसी तरह डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में एक रुपये प्रति डॉलर का बदलाव आने से भारत के आयात बिल पर 2,729 करोड़ रुपये का अंतर पड़ता है। वहीं, तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि देश के आयात बिल पर अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में अप्रैल में फर्क पड़ सकता है लेकिन वह तेल और मुद्रा बाजार में अनिश्चिता के चलते इसके बारे में कोई सही अनुमान नहीं लगा सकते हैं